Table of Contents
- आज की बड़ी खबर
- कंपनी/सेक्टर विश्लेषण: ब्याज दरों का असर
- फाइनेंशियल नंबर्स पर एक नज़र
- पीयर कंपैरिजन: कौन कहां खड़ा है?
- एनालिस्ट रिकमेंडेशंस: क्या खरीदें, क्या बेचें?
- रिटेल इन्वेस्टर के लिए क्या मतलब?
- रिस्क फैक्टर्स: क्या गलत हो सकता है?
- डिसीजन टाइम: आपका अगला कदम क्या हो?
- अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
आज, रविवार, 23 अगस्त 2026 को, एक ऐसी खबर आई है जिसने शायद कई निवेशकों के हेश उड़ा दिए होंगे! आमतौर पर RBI के बड़े बयान कामकाजी दिनों में आते हैं, लेकिन कल शाम एक प्रमुख आर्थिक सम्मेलन में हमारे RBI गवर्नर के भाषण ने पूरे मार्केट को एक 'संडे सरप्राइज' दे दिया है। उनके बयान से साफ संकेत मिले हैं कि महंगाई को काबू करने के लिए केंद्रीय बैंक अब और भी कड़े कदम उठाने को तैयार है। इसका सीधा मतलब है कि ब्याज दरें (interest rates) जल्द ही बढ़ने वाली हैं, और आपकी जेब पर इसका असर सीधे आपकी EMI के ज़रिए पड़ने वाला है।
भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार मज़बूत दिख रही है, लेकिन महंगाई 5% के ऊपर बनी हुई है, जो RBI के कंफर्ट ज़ोन से बाहर है। गवर्नर ने साफ कर दिया कि कीमत स्थिरता (price stability) उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, भले ही इसके लिए ग्रोथ को थोड़ा धीमा करना पड़े। इस 'हॉकिश' (hawkish) रुख से सोमवार को बाजार खुलते ही बैंकिंग, NBFCs और रियल एस्टेट सेक्टर के शेयरों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। तो तैयार हो जाइए, क्योंकि हम इस पूरे घटनाक्रम का गहन विश्लेषण करने वाले हैं ताकि आप एक सूचित निर्णय ले सकें।
आज की बड़ी खबर
शनिवार को एक प्रमुख आर्थिक सम्मेलन में RBI गवर्नर के भाषण ने सबको चौंका दिया। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि बढ़ती हुई महंगाई और बाज़ार में तरलता (liquidity) को नियंत्रित करने के लिए RBI अब एक आक्रामक रुख अपनाएगा। उनके इस बयान का सबसे बड़ा टेकअवे यह है कि रेपो रेट में 25 से 50 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी बहुत जल्द हो सकती है, या तो एक ऑफ-साइकिल मीटिंग में या आने वाली मौद्रिक नीति बैठक में।
यह एक बड़ा बदलाव है, क्योंकि हाल ही में RBI 'वेट एंड वॉच' की नीति अपना रहा था। लेकिन अब, महंगाई के लगातार 5% से ऊपर बने रहने और घरेलू मांग में मज़बूती को देखते हुए, RBI ने 'कीमत स्थिरता' को सबसे ऊपर रखा है। इसका सीधा असर होगा बैंकों और NBFCs के लिए उधारी की लागत पर, जिससे अंततः होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की EMI बढ़ जाएंगी। सोमवार को बाजार खुलने पर बैंकिंग स्टॉक्स में शुरुआती गिरावट और रियल एस्टेट शेयरों में दबाव दिखना तय है।
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कंपनी/सेक्टर विश्लेषण: ब्याज दरों का असर
ब्याज दरों में बढ़ोतरी का असर हर सेक्टर पर अलग तरह से पड़ता है। आइए देखते हैं कि कौन से सेक्टर और कंपनियां सबसे ज्यादा प्रभावित होंगी:
1. बैंकिंग सेक्टर (Featured Bank: Kotak Mahindra)
ब्याज दरें बढ़ने से बैंकों के लिए डिपॉजिट जुटाने की लागत बढ़ती है, लेकिन वे अपनी लोन की दरों को भी बढ़ाते हैं। अगर बैंक लोन की दरें डिपॉजिट से तेज़ बढ़ा पाते हैं, तो उनका नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) बढ़ सकता है। हालांकि, EMI बढ़ने से क्रेडिट ग्रोथ धीमी पड़ सकती है और कुछ मामलों में लोन डिफॉल्ट (NPA) भी बढ़ सकते हैं।
- HDFC Bank: भारत के सबसे बड़े निजी बैंकों में से एक, HDFC Bank, अपनी मजबूत लायबिलिटी फ्रेंचाइजी के लिए जाना जाता है। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से इसकी ग्रोथ थोड़ी धीमी हो सकती है, लेकिन मजबूत बैलेंस शीट इसे संभालने में मदद करेगी।
- ICICI Bank: इसने हाल के वर्षों में अपनी एसेट क्वालिटी में काफी सुधार किया है। दरों में बढ़ोतरी से इसकी ग्रोथ पर भी असर पड़ेगा, लेकिन मजबूत प्रोविजनिंग इसे सहारा देगी।
- SBI: देश का सबसे बड़ा सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक होने के नाते, SBI की पहुंच बहुत व्यापक है। ऊंची दरों से इसकी ग्रोथ पर असर पड़ेगा, लेकिन इसकी वैल्युएशन अन्य प्राइवेट बैंकों की तुलना में आकर्षक बनी हुई है।
- Kotak Mahindra Bank: हमारा फीचर्ड बैंक, Kotak Mahindra Bank, भी इस माहौल से अछूता नहीं रहेगा। एक प्रीमियम प्राइवेट बैंक होने के नाते, इसकी ग्राहक गुणवत्ता काफी अच्छी है, लेकिन उच्च ब्याज दरें क्रेडिट ऑफटेक को प्रभावित कर सकती हैं। NIM पर इसका असर अन्य बड़े प्राइवेट बैंकों जैसा ही रहेगा।
2. NBFCs (नॉन-बैंकिंग फाइनेंस कंपनियां)
NBFCs बैंकों से या मार्केट से फंड जुटाकर आगे लोन देती हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी से इनके फंड जुटाने की लागत सीधे बढ़ जाती है। अगर वे इस बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर पूरी तरह से पास नहीं कर पाते, तो उनकी मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है। साथ ही, ग्राहक की EMI क्षमता पर भी दबाव आता है, जिससे डिफॉल्ट बढ़ सकते हैं।
- Bajaj Finance: यह अपनी तेज ग्रोथ और कंज्यूमर फाइनेंस में दबदबे के लिए जानी जाती है। ऊंची दरों से इसकी फंडिंग कॉस्ट बढ़ेगी और यह अपनी प्रीमियम वैल्युएशन के कारण ज्यादा जोखिम में दिखती है।
- Shriram Finance: यह ग्रामीण और SME सेगमेंट में मजबूत पकड़ रखती है, जो अक्सर ऊंची ब्याज दरों को सहने की क्षमता रखते हैं। हालांकि, फंडिंग कॉस्ट बढ़ने से इसे भी चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
3. रियल एस्टेट सेक्टर
रियल एस्टेट सेक्टर ब्याज दरों के प्रति सबसे संवेदनशील सेक्टरों में से एक है। होम लोन की EMI बढ़ने से घर खरीदने की क्षमता (affordability) कम हो जाती है, जिससे हाउसिंग डिमांड में कमी आ सकती है। डेवलपर्स के लिए भी उधारी की लागत बढ़ जाती है, जिससे नए प्रोजेक्ट्स की लॉन्चिंग और उनकी लाभप्रदता प्रभावित होती है।
- DLF: यह मुख्य रूप से हाई-एंड और प्रीमियम सेगमेंट में है, जो शायद कुछ हद तक अधिक लचीला हो सकता है। लेकिन कुल मिलाकर, मांग में कमी एक जोखिम है।
- Godrej Properties: यह अपनी ब्रांड वैल्यू और अच्छी एग्जीक्यूशन के लिए जानी जाती है। लेकिन ऊंची वैल्युएशन और ब्याज दरों के प्रति संवेदनशीलता इसे कमजोर बना सकती है।
💡 प्रो-टिप: ऐसे समय में, उन कंपनियों पर नज़र रखें जिनकी बैलेंस शीट मजबूत है, डेट-टू-इक्विटी रेशियो कम है, और जो अपनी बढ़ी हुई लागत को ग्राहकों पर आसानी से पास कर सकती हैं।
फाइनेंशियल नंबर्स पर एक नज़र
आइए इन कंपनियों के कुछ प्रमुख फाइनेंशियल नंबर्स पर गौर करें (अनुमानित FY27E के अनुसार):
| कंपनी | मौजूदा कीमत (लगभग) | PE रेशियो (FY27E) | लोन/AUM ग्रोथ (लगभग) |
|---|---|---|---|
| HDFC Bank | ₹1950 | 20x | 15% |
| ICICI Bank | ₹1200 | 18x | 16% |
| SBI | ₹750 | 12x | 12% |
| Bajaj Finance | ₹7500 | 35x | 20% |
| Shriram Finance | ₹2200 | 10x | 15% |
| DLF | ₹850 | 45x | 10% (सेल्स बुकिंग) |
| Godrej Properties | ₹2100 | 60x | 12% (सेल्स बुकिंग) |
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पीयर कंपैरिजन: कौन कहां खड़ा है?
जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो निवेशकों को यह देखना होता है कि कौन सी कंपनी अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
| विशेषता | HDFC Bank | ICICI Bank | SBI |
|---|---|---|---|
| बाजार स्थिति | सबसे बड़ा निजी बैंक | मजबूत निजी बैंक | सबसे बड़ा सार्वजनिक बैंक |
| वैल्युएशन (PE) | 20x (प्रीमियम) | 18x | 12x (आकर्षक) |
| लायबिलिटी फ्रेंचाइजी | मजबूत, कम लागत वाले डिपॉजिट | अच्छी, डिजिटल पर फोकस | व्यापक, लेकिन सरकारी बोझ |
| एसेट क्वालिटी | मजबूत | हाल ही में सुधार, मजबूत | ऐतिहासिक रूप से कमजोर, अब बेहतर |
| EMI असर | मध्यम | मध्यम | मध्यम |
इसी तरह, NBFC और रियल एस्टेट में भी तुलना महत्वपूर्ण है:
| विशेषता | Bajaj Finance | Shriram Finance | DLF | Godrej Properties |
|---|---|---|---|---|
| बाजार स्थिति | कंज्यूमर फाइनेंस में लीडर | ग्रामीण/SME में मजबूत | प्रीमियम रियल एस्टेट | ब्रांडेड रियल एस्टेट |
| वैल्युएशन (PE) | 35x (काफी प्रीमियम) | 10x (आकर्षक) | 45x (प्रीमियम) | 60x (काफी प्रीमियम) |
| ब्याज दर संवेदनशीलता | उच्च (फंडिंग कॉस्ट) | मध्यम (निचले सेगमेंट) | उच्च (डिमांड/फंडिंग) | उच्च (डिमांड/फंडिंग) |
| जोखिम | प्रीमियम वैल्युएशन पर दबाव | फंडिंग कॉस्ट का असर | डिमांड में कमी का जोखिम | प्रीमियम वैल्युएशन पर दबाव |
एनालिस्ट रिकमेंडेशंस: क्या खरीदें, क्या बेचें?
मौजूदा माहौल को देखते हुए, एक्सपर्ट्स की राय थोड़ी सतर्क दिख रही है:
- HDFC Bank: मौजूदा कीमत ₹1950 के आसपास है। एनालिस्ट्स इसे Hold करने की सलाह दे रहे हैं। इसका मतलब है कि नया निवेश अभी न करें, लेकिन अगर आपके पास पहले से है तो बनाए रखें। ₹2000-2050 तक की मामूली बढ़त दिख सकती है, लेकिन जोखिम भी हैं।
- ICICI Bank: ₹1200 के करीब ट्रेड कर रहा है। इसके लिए भी Hold की रेटिंग है। ₹1250-1280 तक के स्तर देखे जा सकते हैं, लेकिन बाजार की अस्थिरता बनी रहेगी।
- SBI: ₹750 के आसपास है। Hold रेटिंग है। इसकी वैल्युएशन आकर्षक है, लेकिन पब्लिक सेक्टर बैंक होने के नाते कुछ चुनौतियां बनी रहती हैं। ₹780-800 तक की सीमित बढ़त की उम्मीद।
- Bajaj Finance: ₹7500 के स्तर पर है। एनालिस्ट्स इसे Reduce करने की सलाह दे रहे हैं। इसकी प्रीमियम वैल्युएशन को देखते हुए, ऊंची ब्याज दरें इसके लिए जोखिम भरी हो सकती हैं। ₹7000 तक नीचे आने की संभावना है।
- Shriram Finance: ₹2200 के करीब है। इसके लिए Hold रेटिंग है। अपनी विशिष्ट ग्राहक आधार के कारण कुछ हद तक लचीला है। ₹2250-2300 तक के स्तर दिख सकते हैं।
- DLF: ₹850 पर है। Reduce की सलाह है। रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव स्पष्ट है। ₹800 तक नीचे आ सकता है।
- Godrej Properties: ₹2100 के आसपास है। इसे भी Reduce करने की सलाह दी जा रही है। इसकी उच्च वैल्युएशन इस माहौल में अधिक जोखिम भरी है। ₹2000 तक के स्तर दिख सकते हैं।
रिटेल इन्वेस्टर के लिए क्या मतलब?
आम निवेशक के तौर पर, यह खबर आपकी फाइनेंशियल प्लानिंग पर सीधा असर डालेगी।
आपकी EMI बढ़ने वाली है: अगर आपका होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन फ्लोटिंग रेट पर है, तो आपकी EMI में बढ़ोतरी लगभग तय है। अपने बैंक से संपर्क करें और देखें कि आप आंशिक प्रीपेमेंट (partial prepayment) या लोन टेन्योर बढ़ाने जैसे विकल्पों पर विचार कर सकते हैं या नहीं।
नए लोन लेने से बचें: अगर आप कोई बड़ा लोन लेने की सोच रहे थे (जैसे नया घर या कार), तो कुछ समय के लिए रुक जाना बेहतर हो सकता है। ब्याज दरें अभी और ऊपर जा सकती हैं, जिससे आपकी मासिक किस्तें काफी बढ़ जाएंगी।
SIP vs Lumpsum: बाजार में अनिश्चितता और ब्याज दरों में बढ़ोतरी के माहौल में, SIP (सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) हमेशा Lumpsum निवेश से ज्यादा सुरक्षित और समझदारी भरा विकल्प होता है। SIP आपको बाजार की अस्थिरता का फायदा उठाने में मदद करता है (rupee cost averaging)।
- रियल एग्जांपल: सोचो यार, अगर तुमने 6 महीने पहले (फरवरी 2026 में) HDFC Bank में ₹50,000 एक साथ (lumpsum) लगाए होते, जब शेयर ₹1800 के आसपास था, तो आज वो ₹1950 हो गया होता, तुम्हें करीब 8.3% का रिटर्न मिलता। लेकिन अगर तुमने हर महीने ₹8333 की SIP लगाई होती, तो तुम औसत कीमत का फायदा उठाते, और आज भी तुम्हारे पास एक मजबूत पोर्टफोलियो होता, भले ही मार्केट सोमवार को थोड़ा नीचे गिरे। यह अनिश्चितता के दौर में बहुत महत्वपूर्ण है।
Groww से कैसे करें निवेश? ऐसे समय में, सही टूल्स का इस्तेमाल करना बेहद ज़रूरी है। Groww जैसे प्लेटफॉर्म आपको अपने निवेश पर बेहतर कंट्रोल देते हैं।
- स्टॉक्स: आप Groww ऐप पर सीधे इन बैंकिंग, NBFC और रियल एस्टेट स्टॉक्स में निवेश कर सकते हैं। आप उनके प्रदर्शन को ट्रैक कर सकते हैं, एनालिस्ट रेटिंग्स देख सकते हैं और रिसर्च रिपोर्ट्स भी पढ़ सकते हैं।
- म्यूचुअल फंड्स: अगर आप सीधे स्टॉक्स के जोखिम से बचना चाहते हैं, तो Groww पर आप इक्विटी या डेट म्यूचुअल फंड्स में SIP शुरू कर सकते हैं। डेट फंड्स, खास तौर पर शॉर्ट-टर्म डेट फंड्स, बढ़ती ब्याज दरों के माहौल में आकर्षक हो सकते हैं।
- फिक्स्ड डिपॉजिट (FD): Groww अब आपको विभिन्न बैंकों की फिक्स्ड डिपॉजिट में भी निवेश करने का विकल्प देता है। बढ़ती दरों के इस माहौल में, अपनी पूंजी को सुरक्षित रखने और बेहतर रिटर्न पाने के लिए FD एक अच्छा विकल्प हो सकती है। 📈 Zerodha आज ही Groww पर अपना अकाउंट खोलें और स्मार्ट निवेश शुरू करें!
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💡 प्रो-टिप: अपनी क्रेडिट रिपोर्ट को नियमित रूप से चेक करें। बढ़ती दरों के कारण अगर EMI डिफॉल्ट होते हैं, तो यह आपकी क्रेडिट स्कोर पर सीधा असर डालेगा, जो भविष्य में लोन लेने की आपकी क्षमता को प्रभावित करेगा।
रिस्क फैक्टर्स: क्या गलत हो सकता है?
इस पूरी स्थिति में कुछ बड़े जोखिम हैं जिन पर आपको ध्यान देना चाहिए:
- बढ़ते NPA (Non-Performing Assets): EMI बढ़ने से लोगों की लोन चुकाने की क्षमता पर दबाव आएगा, जिससे बैंकों और NBFCs के लिए NPA बढ़ सकते हैं।
- क्रेडिट ग्रोथ में गिरावट: ऊंची ब्याज दरें नई लोन की मांग को कम कर देंगी, जिससे समग्र क्रेडिट ग्रोथ धीमी पड़ जाएगी। यह अर्थव्यवस्था की रफ्तार के लिए अच्छा नहीं है।
- रियल एस्टेट में डिमांड शॉक: होम लोन महंगा होने से घरों की बिक्री में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे डेवलपर्स पर वित्तीय दबाव बढ़ेगा।
- ग्लोबल हेडविंड्स: अगर वैश्विक अर्थव्यवस्था में कोई बड़ा झटका लगता है (जैसे मंदी या भू-राजनीतिक तनाव), तो भारत की चुनौतियां और बढ़ सकती हैं।
- महंगाई का और बढ़ना: अगर RBI के कदम भी महंगाई को पूरी तरह काबू नहीं कर पाते, तो और भी कड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं, जिससे बाजार में और अस्थिरता आएगी।
डिसीजन टाइम: आपका अगला कदम क्या हो?
RBI गवर्नर का यह 'संडे सरप्राइज' साफ संकेत देता है कि अब 'ईज़ी मनी' का दौर खत्म हो रहा है। ब्याज दरें बढ़ेंगी, तरलता (liquidity) कम होगी, और इसका सीधा असर आपकी पर्सनल फाइनेंस और आपके निवेश पोर्टफोलियो पर पड़ेगा।
मेरी फाइनल रिकमेंडेशन यह है:
- सतर्क रहें, घबराएं नहीं: बाजार में सोमवार को गिरावट आ सकती है, लेकिन पैनिक सेलिंग से बचें।
- अपना लोन पोर्टफोलियो रिव्यू करें: अगर आपके फ्लोटिंग रेट लोन हैं, तो EMI बढ़ने के लिए तैयार रहें और प्रीपेमेंट के विकल्पों पर विचार करें।
- इक्विटी में चयनशील रहें: सीधे तौर पर ब्याज दर संवेदनशील सेक्टरों (जैसे रियल एस्टेट, कुछ NBFCs) से दूरी बनाएं। बैंकिंग सेक्टर में भी चुनिंदा कंपनियों पर ही फोकस करें जिनकी एसेट क्वालिटी मजबूत हो। HDFC Bank और ICICI Bank जैसे बड़े नाम 'Hold' की कैटेगरी में हैं, लेकिन नए निवेश के लिए बहुत आकर्षक नहीं।
- SIP जारी रखें: अगर आप इक्विटी में निवेश करना चाहते हैं, तो SIP सबसे अच्छा तरीका है। यह आपको बाजार की गिरावट का फायदा उठाने में मदद करेगा।
- फिक्स्ड इनकम पर विचार करें: बढ़ती ब्याज दरें फिक्स्ड डिपॉजिट और शॉर्ट-टर्म डेट फंड्स को आकर्षक बना सकती हैं। अपनी पूंजी के कुछ हिस्से को सुरक्षित रखने के लिए यह एक अच्छा विकल्प है।
- ज्ञान ही शक्ति है: बाजार की हर खबर पर अपनी नज़र बनाए रखें। 💰 Groww हमारे अन्य मार्केट एनालिसिस ब्लॉग्स पढ़ते रहें ताकि आप हमेशा अपडेटेड रहें। 🏦 INDmoney पर्सनल फाइनेंस प्लानिंग के लिए विशेषज्ञ सलाह लेना न भूलें।
यह समय धैर्य और समझदारी से काम लेने का है, मेरे दोस्त!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या मेरी EMI तुरंत बढ़ जाएगी?
जवाब: हाँ, अगर आपका लोन फ्लोटिंग रेट पर है और RBI रेपो रेट बढ़ाता है, तो बैंक जल्द ही अपनी लेंडिंग रेट्स (जैसे MCLR या EBLR) बढ़ा देंगे। इससे आपकी EMI में बढ़ोतरी लगभग तय है।
2. सोमवार को स्टॉक मार्केट पर क्या असर होगा?
जवाब: सोमवार को बाजार खुलने पर बैंकिंग, NBFCs और रियल एस्टेट शेयरों में शुरुआती गिरावट देखने को मिल सकती है, क्योंकि निवेशकों को बढ़ी हुई ब्याज दरों और धीमी क्रेडिट ग्रोथ की चिंता होगी। ओवरऑल मार्केट में भी अस्थिरता रह सकती है।
3. क्या अब रियल एस्टेट में निवेश करना सही है?
जवाब: मौजूदा माहौल में, जब ब्याज दरें बढ़ रही हैं और होम लोन महंगे हो रहे हैं, रियल एस्टेट में नए निवेश से बचना समझदारी हो सकती है। डिमांड कम होने से प्रॉपर्टी की कीमतों पर दबाव आ सकता है।
4. म्यूचुअल फंड्स पर क्या इंपैक्ट होगा?
जवाब: इक्विटी म्यूचुअल फंड्स पर वही असर होगा जो शेयर बाजार पर होता है। डेट म्यूचुअल फंड्स, खासकर लॉन्ग-ड्यूरेशन वाले, ब्याज दर बढ़ने पर नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकते हैं। शॉर्ट-टर्म डेट फंड्स या लिक्विड फंड्स इस माहौल में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।
5. स्मॉल कैप/मिड कैप स्टॉक्स का क्या होगा?
जवाब: स्मॉल कैप और मिड कैप स्टॉक्स आमतौर पर लार्ज कैप की तुलना में अधिक अस्थिर होते हैं। ब्याज दरों में बढ़ोतरी और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में ये सेगमेंट अधिक दबाव में आ सकते हैं। इनमें निवेश करने से पहले बहुत सावधानी बरतें और गहन रिसर्च करें।
⚠️ Disclaimer: ये आर्टिकल सिर्फ एजुकेशनल पर्पस के लिए है। कोई भी इन्वेस्टमेंट डिसीजन लेने से पहले SEBI रजिस्टर्ड फाइनेंशियल एडवाइजर से कंसल्ट करें। मार्केट रिस्क होती है।